Ye Muqaddar Ki Baat Hai..
Two Line
क्या रोग दे गयी है, ये नए मौसम की बारिश... मुझे याद आ रहे है... मुझे भूल जाने वाले ! ...
यादों की आग थी ख़यालो की चांदनी रात भर मेरे घर में एक रोशनी रही। . . .
कोई और ही काम सौंप दो तुम मुझे अब .. ये क्या, तुझे सोचना.. और सोचते ही रहना। . . .
आलम कुछ ये है इस बेदर्द शाम का.. अकेलापन.. तन्हाई.. जुदाई.. और तेरी याद।
कर रहा था ग़म ए ज़िंदगी का हिसाब आज तुम याद बेहिसाब आये। …
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