Zindgi Hai Char Din Ki..
ज़िंदगी है चार दिन की... कुछ भी ना गिला कीजिये.. दवा.. ज़हर... जाम... इश्क़... जो मिले.. मज़ा लीजिये। ...
ज़िंदगी है चार दिन की... कुछ भी ना गिला कीजिये.. दवा.. ज़हर... जाम... इश्क़... जो मिले.. मज़ा लीजिये। ...
उससे कहना मेरी सजा में कुछ कमी कर दे ए-दोस्त आदि मुजरिम नहीं हूँ... गलती से इश्क़ हुआ था।
हम तेरे साथ जरूर खुलेंगे सब्र कर.. एक रोज तुझे अकेले मिलेंगे सब्र कर.. इज़हारे इश्क़ में वक़्त लगता है.. फ़िलहाल तो बस…
सुना है के ज़िंदगी इम्तिहान लेती है, ऐ-दोस्त.. हमारी तो इम्तिहानो ने ज़िंदगी ले ली। ...
ना दुआ है.. ना मरहम है.. ना दवाई है.. ऐ-इश्क़ तेरे टक्कर की एक चीज़ आयी है। ... Covid-19
ज़रा देखो ये दरवाज़े पर दस्तक किसकी है.. अगर इश्क़ हो तो कहना.. यहाँ कोई नहीं रहता। ..
तेरी इन मस्त आँखों को कँवल कह गया हूँ मैं.. महसूस कर रहा हूँ .. गजल कह गया हूँ मैं। ...
एक चेहरा है जो आँखों में बसा रहता है एक तसव्वुर है जो तनहा होने नहीं देता। ...
तोहमतें तो लगती रहीं रोज़ नई नई हम पर, मगर जो सबसे हसीन इल्जाम था वो तेरा नाम था।
तमन्ना वजूद की होती तो दुनिया से छीन लाता इश्क़ तेरी रूह से है इसलिए खुदा से मांगता हूँ ! ...
माना की मेरा मुक़द्दर तुम नहीं लकिन मेरी तक़दीर से लड़कर मेरे एक बार हो जाओ।
चल रहे है जमाने में रिश्वतो के सिलसिले … तुम भी कुछ ले~दे कर, मुझसे मोहब्बत कर लो !
उसकी आँखों में नज़र आता है सारा जहां मुझ को ... अफ़सोस कि उन आँखों में कभी खुद को नहीं देखा !
वो इस अना में के हम उनको उनसे ही मांगे हम इस गुरूर में के हम अपनी ही चीज़ क्यों मांगे !
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